25 October 2025
Lauva Bhaat Exodus
19 October 2025
पूर्ण समर्पण- एक हुंकार दीवार के आर-पार
मैं थूक के चाट लूँगा,
ख़ुद को ही डाँट लूँगा
नहीं ये कारावास सहनीय,
कभी नस अपनी काट लूँगा।
तू है गरल स्वामिनी,
बिजली, वज्रा, दामिनी
न तनिक भी विषहीन,
क्षमा देहि हो सुकामिनी।
तोड़ दें ये हम दीवारें,
आत्मा जो मेरी मारे
जान-जहान यदि बचे तो
ही सम्मान की आरती उतारें।
कैसे अब से तुम तक भेजें
अंतिम पासा बड़ा सहेजे?
ये संधि, नहीं, पूर्ण समर्पण
मेरे विचार, चित्त, कलेजे।
नहीं आसान होता इतना,
सोच कोई भी लेगा जितना
नियाज़ी ने किया, किया था ग़ौरी ने
लेकिन शर एक है, एक है दिमाग़ बित्तना।
यदि तुम चाकू भोंक देती,
या दूध में विष घोल लेती,
|या होता बस एक द्वंद्व
तो फिर मेरा कुआँ, मेरी खेती।
पर नहीं हुआ ऐसा कुछ निर्दय अशिष्टाचार
न लगे जय घोष, न भरे गए कोई हुंकार
आख़िर सच ही कह गए हैं हम लोगों के पुरखे
जहाँ काम आए सुई, उधर क्या करे तलवार।
हाँ, आज तुम्हारी जय है
तेरा प्रेम ही अजय है
तू बहन मेरी थी, है,
मैं अंधा, तू मेरा संजय है।
दिवार के पार तकरार
कल तुमसे हमने कहा
ये दीवार काफ़ी बड़ी है
कील इसपे जो है
हम दोनों को ही गढ़ी हैं |
नहीं, केवल मुझपे ही ये
आघात हुआ है, चोट पड़ी है
तुम अन्धे हो, बहरे हो
चीखें निकलीं मेरी हर घड़ी हैं |
ये कह कर हमें तुमने दप्पत दिया
कि हमको तो बस अपनी ही पड़ी है
हाँ, माना तुम फ्लोरेन्स् नाइटिंगेल्
तू रात दिन मेरे घाव देख खड़ी है |
"लेकिन अपनी पीड़ा अपने तक रखो"
मेरे इस विचार से तू चिढ़ी है
"दोस्त नहीं मानता है तू भाई"
ये रट तुझे ही तो पड़ी है ।
मन दबा कर, हमने दबे विचार
आज़ाद किए, फिर भी तू लड़ी है
हम घुट घुट चुप-चाप मर जाते
तुझे क्या "speak up" की पड़ी है?
18 October 2025
हमारे बीच एक काँच कि दिवार है
हमारे बीच एक काँच कि दिवार है
मनोवैज्ञानिक एक ये चमत्कार है
तुम्हे दिखत सिलैटी धातु
मुझे साफ़ साफ़ आर पार है |
हमारे बीच एक काँच कि दिवार है
सौ सुर्यें सहित समस्त संसार है
उषा विना रष्मी रहित रक्त रसित
इधर केवल शुन्य अन्धकार हे |
हमारे बीच एक काँच कि दिवार है
माना हम देख सकते आर पार है
किन्तु फायदा क्या ? कहा है तुम्ने
अन्ध, अन्धा ,आँधरा हुम तो लाचार हे |
01 October 2025
Is my room too full? ??
My room is full,
the floor is full, the shelves are full,
the bed, the boxes
everything is full.
It is but you who
is to blame, and is to be thanked too
for all the stuff
that makes an OCD cuckoo.
Every once in a while
(perhaps more frequently) you send stuff with a smile.
Thekua, Nimki, adrak
never caring for money nor miles.
Yet I can never find
in room, heart or mind
to thank you, show some gratitude
to my support hind.
Did I grow too much?
I have no room for you and what you make for lunch?
Unexpectedly, unwillingly
I make it seems such.
Review: The Housemaid is Watching
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