18 October 2025

हमारे बीच एक काँच कि दिवार है

 हमारे बीच एक काँच कि दिवार है

मनोवैज्ञानिक एक ये चमत्कार है

तुम्हे दिखत सिलैटी धातु

मुझे साफ़ साफ़ आर पार है |


हमारे बीच एक काँच कि दिवार है

सौ सुर्यें सहित समस्त संसार है

उषा विना रष्मी रहित रक्त रसित

इधर केवल शुन्य अन्धकार हे |


हमारे बीच एक काँच कि दिवार है

माना हम देख सकते आर पार है

किन्तु फायदा क्या ? कहा है तुम्ने

अन्ध, अन्धा ,आँधरा हुम तो लाचार हे |





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