Ras Bhang by Akshaya BahibalaMy rating: 2 of 5 stars
ये किताब बहुत कुछ करना चाहती है, लेकिन अंततः असफल रहती है। आत्मकथा, यात्रावृत, सामाजिक चित्रण एवम् ऐतिहासिक-चिकित्सीय-वैधानिक लेख, सब कुछ समेटने का प्रयास है। इसमें मेरी माने तो केवल पहला ही हिस्सा रोचक था। शोध उतना कुछ खास नहीं है। पढ़ने के बाद ये भी प्रतीत होता है की लेखक उड़िया होने के बावजूद भी काफ़ी हद तक स्थानीय प्रथाओं स्थानीय परंपराओं को एक बाहरी दृष्टि से देखता है। मैंने सोचा था ये मूल रूप से उड़िया में लिखी किताब का अनुवाद है। लेकिन असल में Bhang Journeys: Stories, Histories, Trips and Travels मूल किताब है जिसका अनुवाद Vyalok
ने किया है। भाषा बहुत सहज है और मालूम नहीं होता कि इसका अनुवाद अंग्रेज़ी से हुआ है । Abhishek Shukla की Deep Work और M.L. Parihar की Jaat-Paant Ka Vinash (जात-पांत का विनाश) दोनों में साफ़ पता चलता है, पर यहाँ ऐसा नहीं है। यद्यपि किताब उतनी खास नहीं है, फिर भी आधुनिक हिंदी अनुवाद के एक नमूने के तौर पर इसके लिए विशेष स्थान है।
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