29 November 2025

काम पूरा हुआ? Happily Ever After का भ्रम

 किसी भी बड़े काम को छोटे छोटे कामों में बात लिया जाए और फिर क्रमबद्ध तरीके से करें तो आसानी होगी। ये एक जग प्रसिद्ध उक्ति है। मुझे कभी तर्क समझ नहीं आया। आखि़र तो काम पूरा ही करना है, और मनोविज्ञान तोर से तो यदि हम एक काम कर लें तो एक आलस्य आ जाता है। अभी 4 दिन पहेली सेमिनार हो गया , तब से एक नया काम नहीं हुआ अपने लिए। DD और नई लड़की जिसका ज़िक्र एक दफ़ा किया था उनका थोड़ा ज़्यादा मदद किया। बाकियों का भी इधर उधर कुछ। लेकिन रूम में झाड़ू भी लगा दे ये नहीं होता साहस। आगे क्या पढ़ना है कुछ रखें हैं, लेकिन ये मोहिम भी यहीं तक सीमित है।

दरअसल कुछ सफल हो, जैसे ये सेमिनार या पहले भी कोई परीक्षा, तो जो अंदरूनी सुकून आता है और आगे काम में मन नहीं लगता । इति समापन । ॐ शांति शांति शांति। लेकिन ये सब फ़िल्मों किताबों की बाते हैं कि Lived Happily Ever After | असल में तो एक ही यात्रा अंतिम है, एक ही धाम मुक्ति धाम। उससे पहले किसी मंजिल में नहीं है आराम। आखिर आराम हराम है। लेकिन हम शायद हरामखोर ही हैं। कठोपनिषद्  में भी अंत और मोक्ष के बारे में कुछ ऐसा ही कहा गया है, स्वामी सर्वप्रियानंद से यूट्यूब पे देख कर पढ़ रहा था एक समय। लेकिन बीच में छूट गया तो छूट ही गया। अब देखते हैं, फिर से चालू करने का मन को बहुत है। शायद ज़ेनो की भी गलती ये ही थी कि को काम को भाग भाग में तोड़ देता था, आत्मा एक है और कर्म का हिसाब भी अथक हो रहा है, तो शायद जीवन को भागों में और काम को उपक्रमों में नहीं तोड़ना चाहिए।



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