19 November 2025

सेमिनार से बड़ा सेमिनार, Advanced PDE की मार

 हर 6 महीने में सेमिनार देना होता है। 25 को फिर देना है, पहले भी बोले थे। कल उसका ही mock है। तीसरी बार देंगे इस बार तो उतना, यदि बंगालियों की भांति बोले तो, चाप नहीं आ रहा। अच्छा है। शायद आदत सी हो गई है अब। लोगों के सामने बोलने में शायद पांचवीं कक्षा से ही डर लगने लगा था। कारण अज्ञात है। अब ज़हर का नाम जान के क्या ही फायदा? नहीं फायदा तो है, Anti venom शायद सब का अलग होता है। थेरैपी का शायद ये ही फण्डा है। ज्ञान होना चाहिए ये सब का भी। 

लेकिन ये ज्ञान recommended श्रेणी में है, सेमिनार आवश्यक है। उसका मोटा मोटा आ ही गया है। उससे खराब दिक्कत तो लेकिन Advanced PDE में है। हाँ बहुत अच्छा विष्य है, वर्कशॉप भी जा रहे हैं। लेकिन जैसे उस वर्कशॉप की चिन्ता है वैसे ही अब course के लिए भी लग रहा है। 

अधिकांश तो आर सर के विष्य में अधिकतर मेरा काम चल जाता । उनका जीवन बुनियाद में ही समर्पित है । अच्छी बात है। गणित शब्दों या अंकों (Number Theory करने वालों भाइयों के लिए एक सावधानी) को इधर उधर करना और एक equation या वाक्य गढ़ देना नहीं है। क्लर्कगिरि नहीं है ये। रामानुज क्लर्क थे, लेकिन जब ये नौकरी मांगने गए तो Ramanujan: The Man and the Mathematician ( मेरी समीक्षा) में लिखा गया है कि उसने कहा लिया कि

 Ramaswamy Ayyar: It is too bad. If you become a clerk in any of these offices, your mathematical abilities will soon dis- appear. I do not want to sin that way.

अब उनपे देवी नामगिरि की असीम कृपा थी । लेकिन अय्यर साहब की बात हम आम लोगों पे वैध है । आर सर जैसे लोग हम शोधशास्त्रों को इस क्लर्कगिरि के जाल से बचाने में लगे हुए हैं। कई बार इसको इतना श्रेय मिलता नहीं, श्रेय दूर अपयश मिलता है। लेकिन ये सुकर्म है, आवश्यक है। हम 3 ही छात्र है इस विष्य में । तो internal के 13 अंक के लिए सब को एक एक सवाल present करने दिए हैं। अब सवाल सुन ही लें, Integration by parts on   ${H^1 ({\mathbb{R}_+}^2)}$ और Trace map के Image पे है। हमारी किताब में है दोनों। हम Kesavan की Topics in Functional Analysis and Applications ही पढ़ते हैं कक्षा में, इसमें ही 2.8.1 और 2.8.2 देना है। मुझे 2.8.2 का दूसरा भाग मिला। लेकिन इसमें त्रुटि है, और चोटी मोटी नहीं, पूरा का पूरा proof नष्ट कर देने वाली। बहुत ही basic गलती है, जिसका derivative ही नहीं उसे Schwartz कह रहा है। अब इतना ही गलत होगा ये थोड़ी कोई सोचेगा। हम भी सोचे नहीं थे । आज present करना था, उसके घंटे भर पहले जाने की क्या कांड कर रहा है किताब में। घबरा उठे । जल्दबाजी में  Strongly Elliptic Systems and Boundary Integral Equations में जवाब मिला । कक्षा की और जाते हुए ही पीडीएफ फाइल मिली। आज तो गए भईया। मेरा नंबर दूसरा था। लेकिन जब चालू की पांचाली (नाम बदला हुआ) तो बेचारी को 20 मिनिट जो मिले थे, उसमें तो कुछ नहीं हुआ। एक घंटे में भी कुछ हुआ नहीं। फिर पता नहीं किसकी महर थी, shayad मंगल है न आज, नॉनभेज त्यागने का फल है बंजारबली से, लेकिन R सर ने कहा कि तीसरा होगा। उसका तो चालू करने से पूर्ण एक बुनियादी सिद्धांत पे रोक दिया। दरअसल वो, मैं और किताब भी एक छोटी सो चीज़ को नज़रंदाज़ कर रहें थे। लेकिन सर से नहीं छिपता ये, कैसे छिपे? निठरता तो घोल पी गए हैं। आस रखे थे कि हम लोग भी अब तक कुछ चरणामृत की भांति पिए होंगे। नहीं लेकिन खड़े उठे आज तो। नहीं उठे। उनको न वाक्चातुर्य से मतलब है ना हि एकान्तप्रयास से। कई दफ़ा तो बाहर चले गए कहके कि तुम लोग आपस में बात चीत कर लो । अब परसों मेरा है। सेमिनार, जो 300 नंबर का है, उससे ज्यादा इसमें, 13 नम्बर का, से डर लग रहा है। लेकिन सच कहे तो इसमें सीख भी अधिक रहे है। अब चलो 2 दिन ईश्वरीय कृपया से मिला है तो अच्छा है। तो Krantz की Partial Differential Equations and Complex Analysis में भी छान बीन किए, और मिला। ये सबसे मंगनी किताब है मेरी, फेलो बार काम आई अभी। सही है। लेकिन इस आदमी का काम बहुत व्यापक है। मेरे से भी बहुत मिलता जुलता है। एक न एक बार इससे मिलना है। 

अगर PDE की किताबों की बात हो तो महाविद्यालय में बहुत सी पढ़ी । Partial Differential Equations with Fourier Series and Boundary Value Problems ( मेरी समीक्षा), सिंह-शर्मा की Partial Differential Equations for Engineers And Scientists, Sneddon की Elements of Partial Differential Equations ( तस्वीरों ), Amaranath की An Elementary Course In Partial Differential Equations ( मेरी समीक्षा),  लोकनाथ देबनाथ की  Linear Partial Differential Equations for Scientists and EngineersRaisinghania ये सब तो भाई नहीं। Coleman की  An Introduction to Partial Differential Equations with MATLAB पे प्रतिक्रिया तो अच्छी लिखी थी, लेकिन कुछ याद नहीं आ रहा। छाप तो कोई नहीं है। और तब तो अपरिपाक्क था। फिर से देखना होगा, ही था क्या। डिस्ट्रीब्यूशन Theory से तो था नहीं, मतलब असली गणित के तौर पे तो निकम्मी ही है। अब खैर, हर किताब का एक पाठक होता है। इन सब का मैं न था। कोई न कोई होगा। अभी तो चिंतना मेरे इस सेमिनार को हे, और उसके बाद अलसी वाले सेमिनार की ।



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