पत्र वत्र लिखने के बाद
प्रेम के शूर से हया के
मोटे पर्दे चीरने के बाद
ये पल हैं अब दया के।
दया करनी है पल पल के बाद
पल पल से भी है वही आस
दया करे वो भी पढ़ने के बाद
उस पल तक तो अटकी रहे सास।
सास फूली गाल लाल, कहने के बाद
सर चकराए, हाय, जी घबराए
अंतहीन एक मौन के अंतिम पद के बाद
अब तो बस जी घबराए, मचलाए।
मचलाए क्यों ना हम इन सब के बाद
परीक्षार्थी को ना होती है क्या कुंजी की खोज?
इज़हार ए इश्क़ भी एक इंतहाम है, और उसके बाद
ना सुहाते भाई बंधु, हूरें, निद्रासन या छप्पन भोग।
भोग धूप आरती सब तरह के पूजन के बाद
विनती है कि हे माँ! अब तेरी ही सहारा है
ये जो तेरी बिटिया है बोल इसके सोचने के बाद
दिल ए आवारा को इसका क्या अब इशारा है।
इशारा समय जो बीत चला नित नित दिन के बाद
करता एक ही ओर, ये नहीं अब केवल नारी है
बनी है ये मेरी भाग्यस्वामिनी इज़हार के बाद
ये ही अब दारोगा, कलैक्टर और पटवारी है।
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